Chittorgarh

चित्तौड़गढ़ – एशिया का सबसे बड़ा किला | Chittorgarh Fort In Hindi | 

चित्तौड़गढ़ – एशिया का सबसे बड़ा किला | Chittorgarh Fort In Hindi | 

एशिया का सबसे बड़ा किला है चित्तौड़गढ़ का किला। इसका निर्माण सात वीं शताब्दी में मोर्य शासकों द्वारा किया गया था । यह किला शक्ति, भक्ति ,त्याग और बलिदान से परिपूर्ण है । शक्ति के अंतर्गत महाराणा प्रताप भक्ति में मीरा बाई, त्याग में दासी पन्नाधाय और बलिदान में रानी पदमनी, इस किल्ले की शान है ।  चित्तौरगढ़ किल्ला सूर्यवंशी राजाओं का इतिहास बताता है इसी वजह से इस किले पर पूर्वी दिशा में यानी की सूर्योदय की तरफ़ एक दरवाजा है जिसे सूरजपोल कहा जाता है और पीछे की तरफ जो कि आजकल आने जाने के लिए काम में लिया जाता है वहाँ पर सात दरवाजे हैं। यह किला 13 किलोमीटर में फैला हुआ है । यह 700 एकड़ में बसा हुआ है । ऐसी किवंदती है कि इस किले का निर्माण सिर्फ एक ही रात में महाभारत के समय पाण्डु भाइयों में सबसे बलशाली राजकुमार भीम ने अपने अद्भुत शक्ति का इस्तेमाल करके किया था ।

 चित्तौरगढ़ किल्ले का इतिहास  History of Chittorgarh fort : 

इतिहास के अनुसार इस किले का निर्माण सातवीं ईस्वी में करवाया गया था। मौर्यवंश के राजा हुआ करते थे चित्रांग , उन्होंने इस किले का निर्माण करवाया था इसी वजह से उस समय इसे चित्रकूट के नाम से भी जाना जाता था । सातवीं सदी से लेकर नवीं सदी तक यहाँ पर मौर्यवंशी राजाओं ने इस किले पर राज किया ।  उसके बाद सूर्यवंशी राजाओ का आधिपत्य रहा है । सूर्यवंशी राजाओं में सबसे प्रथम महाराणा कुम्भा ने यहाँ पर शासन किया उन्हीं के नाम पर चित्तौड़गढ़ के पास एक जगह है कुमभलगढ़ , उसकी स्थापना हुई  ।    नवी शताब्दी से लेकर 16वी शताब्दी तक यहां मुगल राजाओं ने राज किया। इस किले पर लगभग 27 बार आक्रमण किया  ।  इन 27 आक्रमणों मे से 24 बार राजपूत राजाओ की जीत हुई और तीन बार मुगल राजा की जीत हुई । इन 3 हमलों में से दो बार यहाँ पर जौहर किया गया था। 

यहाँ पर पहला जौहर 13वी शताब्दी में हुआ था । उस समय यहाँ के राजा राणा रतन सिंह थे। उनकी पत्नी का नाम पद्मावती था । ऐसा कहा जाता है कि रानी जब पानी पीती थी तो उनके गले से पानी दिखाई देता था । ये बात जब अलाउदीन खिलजी को पता चली तो उसने  रानी को पाने के लिए  किल्ले पर आक्रमण कर दिया । आक्रमण करने के बाद जब उसे पता चला की वो शक्ति से रानी पद्मावत को नहीं हासिल कर पाएगा तो उसने छह महीने के लिए इस पूरे किले की घेराबंदी कर ली और धौके से राणा रतनसिंह को बंदी बनाकर दिल्ली ले गया। उस समय चित्तौड़ की राजपूत सेना और मुगल सेना के बीच युद्ध हुआ और राणा रतनसिंह मारे गए जैसे ही ये खबर रानी पद्मावत तक पहुंचती है उन्होंने राजपूत महिलाओं के साथ जौहर कर लिया ।

दूसरा जोहर  15 वीं सदी में  हुआ था । यह जोहर गुजरात के राजा बहादुर शाह  ने  जब इस किले पर  आक्रमण किया, तब किया गया था । उस समय चित्तौरगढ़ में महाराणा सांगा हुआ करते थे उनकी पत्नी का नाम कर्णावती था। जब ये आक्रमण हुआ तो रानी कर्णावती की रक्षा के लिए यहाँ पर कोई नहीं था उस समय रानी कर्णावती ने हुमायुँ को राखी भेजकर अपनी रक्षा करने हेतु आमंत्रित किया था ।  लेकिन उनको आने में 2 दिन की  देर हुई तो रानी कर्णावती ने अपनी 13000 दासियो के साथ इस किले में जौहर कर लिया।  

इस किले पर आखिरी आक्रमण 1576 में  अकबर ने किया था। इस समय महाराणा प्रताप मेवाड़ के राजा थे । ऐसा बताते है कि महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलो और उनके कवच का वजन 72 किलो था । लगभग 200 किलो के अस्त्र शस्त्र से सुसज्जित महाराणा प्रताप ने अकबर से लौहा लिया था । ये सब आज भी किल्ले पर रखे हुए है । पहले चितौड़गढ़ मेवाड़ की राजधानी हुआ करता था लेकिन उदयपुर के बस जाने के बाद मेवाड़ की राजधानी उदयपुर बनाई गई । 

 

चित्तौरगढ़ में घूमने की जगह  Places To Visit :

विजय स्तम्भ Tower of Victory : 

विजय स्तम्भ को  टावर ऑफ विक्ट्री भी कहा जाता है । इसका निर्माण राणा कुंभ ने करवाया था। गुजरात और मालवा प्रदेश को जीतने के बाद इस विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया गया था। इसका निर्माण 1448 से लेकर 1458 यानी कि 10 सालो में करवाया गया था । इस टावर की ऊंचाई 122 फिट है। यह टावर 9 मंजिला है । इसको शिवजी के डमरु की तरह बनाया गया है । इस टॉवर के ऊपरी भाग से आप चित्तौड़गढ़ का विहंगम दृश्य देख सकते है । 

2. जौहर कुंड  Jouhar Kund :

विजय स्तम्भ के सामने की तरफ ही आजकल एक गार्डन बनाया गया है जो उस समय मे जौहर कुंड हुआ करता था । ये कुंड 50 फिट के लगभग गहरा था । यहा पर रानी ने  चन्दन की लकड़ियों को जलाकर जौहर किया था । 1956 के बाद इसे गार्डन के रूप में विकसित किया गया ।

 3. कीर्ति स्तंभ Tower of Fame :

 इस विशाल दुर्ग के परिसर में एक कीर्तिस्तंभ यानी टावर ऑफ फेम भी बना हुआ है जो कि इस किले की सुंदरता को बढ़ा रहा है । इसकी उचाई 75 फ़ीट  हैं । इसका निर्माण जैन व्यापारी जीजाजी राठौर द्वारा किया गया था इस स्तंभ में जैन मूर्तियाँ को बेहद शानदार तरीके से सजाया गया है । यह किल्ले के दूसरे भाग में स्थित है यानी विजय स्तम्भ के बिल्कुल विपरीत । 

4 रानी पदमावती महल  Padmavat Palace :

दुर्ग के दक्षिणी भाग में स्थित है पद्मिनी पैलेस । यह पानी के अंदर बना हुआ है इसलिए इसे जल महल भी कहा जाता है । यह महल तीन मंजिला इमारत है । बहुत ही अद्भुत वास्तु शैली से इसका निर्माण करवाया गया है । 

5 कुम्भा महल Kumbha Palace :

विजय स्तम्भ के पास ही राणा कुम्भा महल बना हुआ है । ये सबसे प्राचीन स्मारक भी माना जाता है दुर्ग का । इस महल में कई सुंदर मूर्तियां रखी हुई है  जोकी इस महल को और आकर्षित बनाती हैं। उदयपुर को बचाने वाले राजा उदय सिंह का जन्म भी इसी महल में हुआ था।

6 गौमुख कुंड Goumukh Kund :

किले के बीच मे जोहर कुंड के पास ये कुंड बना हुआ है । गौमुख यानी गाय का मुंह । यहां इस गौमुख से कई वर्षों से अनवरत पानी आ रहा है लेकिन अभी तक ये रहस्य है कि ये पानी कहा से आ रहा है । जहां गौमुख का पानी गिरता है वहाँ एक शिवलिंग स्थापित है जिससे यहां शिवजी का अभिषेक होता रहता है । 

7 भिलमत कुंड Bhimlat Kund :  

ऐसा माना जाता है कि जब पांडव वनवास के लिए निकले थे तब भीम ने इस कुंड में लात मारी थी उस वजह से इस कुंड का निर्माण हुआ और वहां पानी आ गया ।

8 लाइट एंड साउंड शो Light  and Sound Show :

इस दुर्ग की गौरव गाथा को याद दिलाने वाला लाइट एवम साउंड शो राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा शुरू किया गया है इसको देखने के लिए पर्यटक दूर दूर से आते हैं । ये शो शाम के समय आयोजित किया जाता है ।

9 म्यूजियम Museum:

 चित्तौड़गढ़ दुर्ग और आसपास जगह पर मिले जो अवशेष है वो इस म्यूजियम में व्यवस्थित रूप से पर्यटकों को लुभाने के लिए रखे गए  है ।यहाँ पर आपको पुरानी वेशभूषा ,बर्तन , अस्त्र और शस्त्र और उस समय रहने वाले लोगों की संस्कृति के बारे में इस म्यूजियम में आपको दिखाया गया है।  

10  कालिका मन्दिर Kalika Temple: 

 यह मंदिर 8 वी शताब्दी में बनाया गया था इस मंदिर में कालिका माता जी की मूर्ति है । पहले इसमे सूर्य प्रतिमा थी लेकिन आक्रमण में उसके टूटने के बाद कालिका माताजी की मूर्ति स्थापित की गई । 

11  नगरी Nagari :

चित्तौड़गढ़ से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित है नगरी गांव । ऐसा बताते है कि जब मुग़ल दुर्ग पर आक्रमण करने आये थे तब नगरी गांव में रुके थे । यहां पर आपको प्रकाश स्तम्भ , हाथी बांधने के लिए हाथी बाड़ा दिखाई देता है जो कि आजकल पर्यटक विभाग के अंतर्गत सुरक्षित है । यहां पर भगवान शिव का सदियों पुराना  मन्दिर भी है । 

चित्तौड़गढ़ किल्ले तक कैसे पहुचे How to reach Chittorgarh Fort 

चित्तौड़गढ़ किला राजस्थान के चित्तौड़गढ़ शहर में बसा हुआ है । चित्तौड़गढ़ आने के लिए आप बस रेल या हवाई मार्ग काम में  ले सकते है । हवाई मार्ग से अगर आपको चित्तौड़गढ़ पहुंचना है तो उसके लिए चित्तौड़गढ़ का सबसे निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर जिले में बना हुआ है । देश के सभी प्रमुख शहरों से उदयपुर हवाईजहाज आते है । यहाँ से आप चित्तौड़गढ़ के लिए बस या टैक्सी का उपयोग कर सकते हैं । दिल्ली अहमदाबाद मुंबई जैसे बड़े शहरों से यहाँ पर रेल की सुविधा उपलब्ध है रेलवे स्टेशन से दुर्ग की दूरी लगभग सात किलोमीटर है। हर बड़े शहर से चित्तौड़गढ़ के लिए बस उपलब्ध हैं।

Food  : यहाँ पर आपको शुद्ध शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के व्यंजन उपलब्ध हो जाएंगे जो कि किले से नीचे की तरफ शहर में है ।

रहने की व्यवस्था Accomodation : रहने के लिए यहां धर्मशाला, होटल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है यहां आकर आपन इन्हें बुक कर सकते है । 

प्रमुख शहरों से चित्तौड़गढ़ की दूरी  Distance from main cities :

दिल्ली से 578 km

मुम्बई से 861 km

जयपुर से 310 km

उदयपुर से 110 km

 

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