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Haldighati Tour In HIndi | महाराणा प्रताप के जीवन को दर्शाती हे राजस्थान की हल्दीघाटी

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Haldighati Tour In HIndi | महाराणा प्रताप के जीवन को दर्शाती हे राजस्थान की हल्दीघाटी

 उदयपुर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध स्थल । हल्दीघाटी को महाराणा प्रताप और अकबर के सेनापति एवम आमेर के राजा मान सिंह के बीच लड़े गए युद्ध के लिए जाना जाता है । इस युद्ध मे महाराणा प्रताप ने मान सिंह को खदेड़ दिया था । इसी वीरता को बयां करती है ये हल्दीघाटी। आज हम आपको हल्दीघाटी और यहां के आसपास की जगहों के बारे में इस ब्लॉग के माध्यम से बता रहे है ।

How to Reach Haldighati  हल्दीघाटी कैसे पहुचे

Haldighati By Flight हल्दीघाटी हवाईजहाज से

हवाईजहाज से हल्दीघाटी पहुचने के लिए यहां का सबसे निकटतम हवाईअड्डा उदयपुर में स्थित है यहां के लिए दिल्ली, मुम्बई और जयपुर से आपको हवाईजहाज मिल जाएंगे । इसके बाद आप हवाईअड्डे के बाहर से टैक्सी या फिर बस लेकर 40 किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक हल्दीघाटी पहुच सकते है ।

Haldighati By Tran हल्दीघाटी ट्रैन से

हल्दीघाटी ट्रैन से पहुचने के लिए भी आपको उदयपुर रेलवे स्टेशन तक पहुचना होता है ।

Haldighati By Bus हल्दीघाटी बस द्वारा

हल्दीघाटी आने के लिए आप उदयपुर तक बस लेकर पहुच सकते है । जयपुर , दिल्ली, अहमदाबाद ,राजकोट आदि जगहों से आपको उदयपुर के लिए सीधी बस मिल जाती है ।

Best Season For Haldighati हल्दीघाटी किस मौसम में जाए

हल्दीघाटी जाने का सबसे बढ़िया मौसम सर्दी का रहता है उस समय मौसम अत्यधिक सुहावना रहता है । इसके अलावा आप बारिश में भी इसकी यात्रा कर सकते है इस समय अरावली की पहाड़ियां पूरी तरह से हरी भरी रहती है जो कि काफी आकर्षक लगती है ।

Where To Stay At Haldighati हल्दीघाटी में ठहरने की जगह

हल्दीघाटी एक बहुत ही प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है  इस वजह से यहां पर आपको बहुत ही कम दामो में रहने की व्यवस्था हो जाती है । अगर आप रिसॉर्ट्स में रहना चाहते है तो भी ये व्यवस्था यहां उपलब्ध है । इन्ही में से कुछ यहां दर्शित है :

Shri Haldi Ghati Palace

Hotel Chetak Palace

Hotel Chetak Inn

Visiting Places At Haldighati  हल्दीघाटी में घूमने की जगह

Rakttalai Haldighati हल्दीघाटी का रक्ततलाई

हल्दीघाटी युद्ध महाराण प्रताप और आमेर के राजा मान सिंह जी जो कि अकबर के सेनापति थे उनके बीच लड़ा गया था । इस युद्ध मे हजारो सैनिक शहीद हुए थे । इस युद्ध स्थल पर चारो तरफ लाशें ही लाशें थी उसी समय मानसून बारिश हुई और वहां के तालाब में बारिश के पानी के साथ साथ खून भी मिल गया तो इस तालाब को रक्ततलाई नाम दिया गया । ये तलाई आज भी विद्यमान है जो कि हल्दीघाटी स्मारक से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।

Chetak Statue Haldighati हल्दीघाटी का चेतक स्मारक

हल्दीघाटी दर्रे से कुछ ही दूरी पर ऊंची पहाड़ी पर बना है चेतक स्मारक । यहां पर महाराणा प्रताप और  चेतक का स्मारक बनाया गया है । ऊंची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां का दृश्य बहुत ही मनोरम होता है । यहां आप फोटोग्राफी का आनन्द ले सकते है ।

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Chetak Samadhi Haldighati हल्दीघाटी का चेतक समाधि

हल्दीघाटी चेतक स्मारक से नीचे की और महाराणा प्रताप के वीर  चेतक की समाधि बनाई गई है । यहां समाधि को एक गार्डन मे विकसित किया गया है । ऐसी समाधि के पास एक पौराणिक शिव मंदिर है जहां पुराने समय मे राजा द्वारा पूजा की जाती थी ।

Haldighati Museum हल्दीघाटी का संग्रहालय

हल्दीघाटी युद्ध और महाराणा प्रताप की वीरता को इस संग्रहालय में  बखूबी दर्शाया गया है । यहां आप 100 रुपये की राशि देकर इसको देख सकते है । यहां पर वीडियो के माध्यम से महाराणा प्रताप के बारे में जानकारी दी जाती है । पुराने समय के औजार और वस्तुएं यहां पर सँजोई गई है । महाराणा प्रताप के समय की कुछ घटनाओं को यहां म्यूजियम में मूर्तियों द्वारा दिखाया गया है । ये सब लाइट एंड साउंड के साथ साथ दिखाए जाते है । इनको देखते हुए रोंगटे खड़े हो जाते है । म्यूजियम के अंदर के भाग में आप खरीददारी भी कर सकते है ।

Nathdwara Shrinath ji Temple नाथद्वारा के श्रीनाथ जी

हल्दीघाटी यात्रा के दौरान आप नाथद्वारा के श्रीनाथ जी के दर्शन करना बिल्कुल भी ना भूले । जिस तरह भारत मे  तिरुपति बालाजी है उसी तरह से मेवाड़ के श्रीनाथ जी है , यहां पर भगवान श्रीनाथ जी की बहुत मान्यता है । यहां मन्दिर बहुत साधारण तरीके से बनाया गया है । श्रद्धालु यहां पर अपन मन्नत मांगते है और दर्शन करते है । यहां भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति पहले एक टेंट में लगाई गई थी । औरंगजेब से बचने के लिए इस मूर्ति को राजा जयसिह ने यहां मंगवा लिया था ।

Nathdwara Shiv Statue  नाथद्वारा की शिव मूर्ति

भारत की शिव मूर्तियों में से सबसे ऊंची शिव प्रतिमा का अनावरण जुलाई 2021 में ही हुआ है । इस प्रतिमा की ऊंचाई 351 फ़ीट है । इस शिव प्रतिमा को ऐसा बनाया गया है कि 250 km/hr की रफ्तार से हवा चल तो भी इसका कुछ नुकसान नही होगा । इस मूर्ति को आप 20 किलोमीटर  दूर से भी देख सकते है । यह मूर्ति बहुत ही आकर्षक है । आप हल्दीघाटी यात्रा के दौरान इसे जरूर देखने जाए । हल्दीघाटी से मूर्ति की दूर लगभग 60 किलोमीटर है ।

Dwarkadhish Temple Kankroli कांकरोली द्वारकाधीश मन्दिर

कांकरोली झील के किनारे बसा है श्री कृष्ण भगवान का भव्य मंदिर । यहां पर श्री कृष्ण की लाल रंग के पत्थर से बनी मूर्ति को स्थापित किया गया है । ये मूर्ति मथुरा से लाई गई थी । 1676 में राजा राज सिंह द्वारा इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था । यह मंदिर उदयपुर से लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।

Charbhuja Gadbour Temple  हल्दीघाटी चारभुजा गढ़बोर

राजसमन्द के गढ़बोर में स्थित है गढ़बोर चारभुजा जी का मंदिर । इस मंदिर का निर्माण राजपूत शासक गंगदेव जी ने करवाया था । चारभुजा जी का ये स्थान अपने आप मे एक अनोखा मन्दिर है । यहां प्रतिदिन सेकड़ो की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते है । चारभुजा गढ़बोर जी का स्थान उदयपुर से 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।

Maha Mangleshwar Temple Haldighati हल्दीघाटी महामंगलेश्वर महादेव मंदिर

हल्दीघाटी म्यूजियम परिसर में स्थित है मेवाड़ के महामंगलेश्वर महादेव मंदिर । इस मंदिर में शिवजी के लिंग को स्थापित किया गया है। यहां हल्दीघाटी आने वाले सभी पर्यटक यहां माथा टेकने जरूर आते है ।

Gulkand And Sharbat Haldighati हल्दीघाटी का गुलकंद और शर्बत

हल्दीघाटी में गुलाब की खेती की जाती है । यहां पर एक सीज़न में पिंक रंग के गुलाब प्रचुर मात्रा में होते है उस समय इनकी एक एक पंखुड़ी को अलग अलग करके उसका गुलकंद और गुलाब शर्बत तैयार किया जाता है । इन्ही गुलकंद और शर्बत की दुकान पूरे हल्दीघाटी में लगाई गई है । अगर आप हल्दीघाटी जा रहे है तो यहां का गुलकंद और शर्बत खरीदना बिल्कुल भी ना भूले ।

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